आधुनिक शिक्षा और प्राचीन जीवन मूल्यों का एक अद्वितीय संगम, जो भविष्य के सुसंस्कृत नागरिकों का निर्माण कर रहा है।
विद्या गुरुकुलम की संकल्पना सर्वप्रथम मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज द्वारा दिसंबर 2019 में नेमावर में पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के समक्ष प्रस्तुत की गई थी, जिसके लिए उन्हें उनका पावन आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
यह दिव्य विजन 30 अप्रैल 2025 को भोपाल, मध्य प्रदेश में साकार हुआ। "श्री विद्या प्रमाण गुरुकुलम" का विद्यार्जन संस्कार महोत्सव मुनिश्री प्रमाण सागर जी और मुनिश्री संधान सागर जी महाराज की मंगल उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिसने इस महान संस्था की औपचारिक शुरुआत की।
मूल्याधारित शिक्षा के माध्यम से समग्र विकास
प्रतिभाशाली जैन छात्रों (कक्षा 6 से) के लिए पूर्णतः निशुल्क शिक्षा, आवास और कोचिंग। प्रवेश केवल योग्यता के आधार पर होता है, किसी सिफारिश पर नहीं। प्रति कक्षा मात्र 30 छात्रों का चयन गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
हम केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विकास, नैतिक मूल्य, और चरित्र निर्माण पर जोर देते हैं। वैदिक गणित, संस्कृत, प्राकृत, संगीत और दर्शन हमारे पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग हैं।
छात्रों को भारतीय ग्रामीण संस्कृति से जोड़ने के लिए कृषि तकनीक, गोपालन और पारंपरिक हस्तशिल्प का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है, ताकि वे आत्मनिर्भर और संस्कारवान बनें।
देशभक्ति, नैतिक दायित्व, राजनीतिक जागरूकता और आर्थिक दृष्टि से छात्रों को सशक्त बनाना, ताकि वे कल के जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।